कभी आसान कोई मंज़िल नहीं मिलती

कभी आसान कोई मंज़िल नहीं मिलती ,
क्यों न फिर हटके कोई काम किया जाये।

बने बनाये रास्तों पर तो कोई भी चल लेगा ,
क्यों न फिर खुद अपना रास्ता बनाया जाये।

सच की डगर पे चलना है बहुत मुश्किल,
क्यूँ न फिर इस डगर पे चल कर देखा जाये।

समंदर की तह में जाने पे मिलता है मोती ,
क्यूँ न फिर हर बात की तह में पहुंचा जाये।

बहुत आसान है लोगो का दिल दुखाना, रुला देना ,
क्यूँ न फिर रोते हुए लोगों को हंसाया जाये।

हम पर जो नेमतें बरसीं हैं, सब उसका करम है ,
क्यूँ न फिर किसी भूखे को खाना खिलाया जाये।

कुदरत ने हमें दी है माँ के मुक़द्दस प्यार की दौलत ,
क्यूँ न फिर इस दौलत को जहाँ में लुटाया जाये।

सच्चे प्यार की कशिश में होता है जादू ऐसा ,
के दिल दे आवाज़, यार दौड़ा चला आये।

माना की ज़िन्दगी में बहुत मसरूफियत है फिर भी ,
क्यूँ न कुछ वक़्त खुद से गुफ्तगू में बिताया जाये।

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रक़ीब

मुहब्बत क्या चीज़ है समझ लोगे ,
बस इक बेवफा से प्यार करके देखो। 

और आपका रक़ीब भी अच्छा है ,
बस ज़रा चश्मा बदल के देखो । 

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ज़िन्दगी

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कहीं इंतज़ार, तो कहीं क़रार है ज़िन्दगी ,
कहीं प्यार तो , कहीं तक़रार है ज़िन्दगी।

कभी जीत, तो कभी हार है ज़िन्दगी ,
कहीं ऐतबार, तो कहीं शक़ का गुबार हैं ज़िन्दगी।

कभी गुलों की बहार, तो कभी पतझड़ की सूनी राह है ज़िन्दगी।
कहीं प्यार का समंदर, तो कहीं खुद प्यासी है ज़िन्दगी।

कहीं किसी पे निसार, तो कहीं किसी पे भार है ज़िन्दगी ,
कभी हंसाती है , तो कभी रुलाती भी है ज़िन्दगी।

कहीं किसी के प्यार में आशिकी बन जाती है जिंदगी ,
कहीं नफरतों का सैलाब भी बन जाती है ज़िन्दगी।

खुशियों के साथ तो यूँ ही अक्सर गुजर जाती है ज़िन्दगी ,
ग़मों के एहसास के वास्ते मगर थम सी जाती है ज़िन्दगी।

चाहतों और हसरतों का ग़र ख्वाब है ज़िन्दगी ,
मग़र गुज़रे वक़्त की किताब भी है ज़िन्दगी।

कल की यादें , कल के सपने ,
इसी उधेड़बुन में अक्सर गुजर जाती है ज़िन्दगी।

ये जो फ़क़त लम्हा ज़िंदा है अभी ,
इसको तो जैसे भूल ही जाती है ज़िन्दगी

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आओ नए साल में कुछ काम करें…

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फिर आज दिल पे गुज़री हर बात गुज़री है…

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