कभी आसान कोई मंज़िल नहीं मिलती

कभी आसान कोई मंज़िल नहीं मिलती ,
क्यों न फिर हटके कोई काम किया जाये।

बने बनाये रास्तों पर तो कोई भी चल लेगा ,
क्यों न फिर खुद अपना रास्ता बनाया जाये।

सच की डगर पे चलना है बहुत मुश्किल,
क्यूँ न फिर इस डगर पे चल कर देखा जाये।

समंदर की तह में जाने पे मिलता है मोती ,
क्यूँ न फिर हर बात की तह में पहुंचा जाये।

बहुत आसान है लोगो का दिल दुखाना, रुला देना ,
क्यूँ न फिर रोते हुए लोगों को हंसाया जाये।

हम पर जो नेमतें बरसीं हैं, सब उसका करम है ,
क्यूँ न फिर किसी भूखे को खाना खिलाया जाये।

कुदरत ने हमें दी है माँ के मुक़द्दस प्यार की दौलत ,
क्यूँ न फिर इस दौलत को जहाँ में लुटाया जाये।

सच्चे प्यार की कशिश में होता है जादू ऐसा ,
के दिल दे आवाज़, यार दौड़ा चला आये।

माना की ज़िन्दगी में बहुत मसरूफियत है फिर भी ,
क्यूँ न कुछ वक़्त खुद से गुफ्तगू में बिताया जाये।

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