और भी हैं

क्यों बेचैन है उसकी खातिर ,
दिल बहलाने के बहाने और भी हैं।

 

तेरी चाहत के अलावा इस दुनिया में ,
ग़म के फ़साने और भी हैं।

 

क्यों आँखों में है तश्वीर उन्ही की ,
देख ज़माने में नज़ारे और भी हैं।

 

क्यों उससे तुझे है वफ़ा की उम्मीद ,
ज़माने में बेवफा और भी हैं।

 

उसकी मुहब्बत के जाम को तरसा तो क्या ,
दुनिया में मयखाने और भी हैं।

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