ज़िन्दगी

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कहीं इंतज़ार, तो कहीं क़रार है ज़िन्दगी ,
कहीं प्यार तो , कहीं तक़रार है ज़िन्दगी।

कभी जीत, तो कभी हार है ज़िन्दगी ,
कहीं ऐतबार, तो कहीं शक़ का गुबार हैं ज़िन्दगी।

कभी गुलों की बहार, तो कभी पतझड़ की सूनी राह है ज़िन्दगी।
कहीं प्यार का समंदर, तो कहीं खुद प्यासी है ज़िन्दगी।

कहीं किसी पे निसार, तो कहीं किसी पे भार है ज़िन्दगी ,
कभी हंसाती है , तो कभी रुलाती भी है ज़िन्दगी।

कहीं किसी के प्यार में आशिकी बन जाती है जिंदगी ,
कहीं नफरतों का सैलाब भी बन जाती है ज़िन्दगी।

खुशियों के साथ तो यूँ ही अक्सर गुजर जाती है ज़िन्दगी ,
ग़मों के एहसास के वास्ते मगर थम सी जाती है ज़िन्दगी।

चाहतों और हसरतों का ग़र ख्वाब है ज़िन्दगी ,
मग़र गुज़रे वक़्त की किताब भी है ज़िन्दगी।

कल की यादें , कल के सपने ,
इसी उधेड़बुन में अक्सर गुजर जाती है ज़िन्दगी।

ये जो फ़क़त लम्हा ज़िंदा है अभी ,
इसको तो जैसे भूल ही जाती है ज़िन्दगी

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