फिर आज दिल पे गुज़री हर बात गुज़री है ,
ब-ख़ुदा क्या क़यामत की रात गुज़री है |
अश्क के आईने में तेरे रुख-ए-माहताब को देखा ,
क़तरा क़तरा पलकों से तेरी हर बात गुज़री है |
चन्द कीमती लम्हों के ख्यालों की मौज़ ,
जैसे चाँद तारों की बारात गुज़री है |
क्यूँ ओझल हो गए ढलके अश्कों में सनम ,
नींद ग़ाफ़िल है, पर रात गुज़री है |
मुझ पर तेरी ये इनायतें , ये सख़ावतें ,
तस्व्वुर में सही, जिंदगी साथ गुज़री है |




I like your poetry
Thanks Nusrat