काजल हूँ तेरी आखों का, कभी आंसूं भी दूंगा ,
ज़िन्दगी में बहारों की मग़र रौशनी भी दूंगा।
ज़माने की शोख नज़रों से बचाऊँगा तुझको ,
सीने से मैं ही तो लगाऊंगा तुझको।
दिल में कोई बात हो तो कह देना ,
पलकों में छुपा के मुझको रो लेना।
तेरे अश्कों की गर्मी से पिघल जाऊँगा ,
फिर भी तेरे अश्कों में झिलमिलाऊँगा।
तू जब फिर से मुस्कुराएगी ,
मुझे फिर पलकों पे लगाएगी।
फिर तेरी आँखों में बस जाऊँगा ,
एक दिन तेरे दिल में उतर जाऊँगा।


