और भी हैं Leave a Comment / My Ghazals / By Ishaq क्यों बेचैन है उसकी खातिर ,दिल बहलाने के बहाने और भी हैं। तेरी चाहत के अलावा इस दुनिया में ,ग़म के फ़साने और भी हैं। क्यों आँखों में है तश्वीर उन्ही की ,देख ज़माने में नज़ारे और भी हैं। क्यों उससे तुझे है वफ़ा की उम्मीद ,ज़माने में बेवफा और भी हैं। उसकी मुहब्बत के जाम को तरसा तो क्या ,दुनिया में मयखाने और भी हैं।