यूँ तो हर कदम पे लोग मिलते है,
हम तेरी ही राह तकते जाते हैं।
तुम न आओगे अभी,मालूम है,
फिर भी तेरा इंतज़ार किये जाते है।
तुम करो न करो याद हमें ,
आप हमें बहुत याद आते हैं ।
तन्हाईयों की महफ़िल में हमें ,
तेरे ही अक्स नज़र आते है।
शब् की तारीकियों में हम,
क्यों करवटें बदले जाते हैं।
तुझे मेरा साथ गवारा हो न हो ,
हम तेरे साथ के सपने बुने जातें है।
जाने कब ज़िन्दगी की शाम हो जाये ,
अधूरी हो तुम, क्यों हम अधूरे जिए जाते हैं।



वाहहह बेहतरीन
“तुम करो न करो याद हमें ,
आप हमें बहुत याद आते हैं “।
Thanks